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22-Oct-2020

बाबरी विध्वंस पर 28 साल बाद आया फैसला, आडवाणी, जोशी, उमा भारती सहित सभी आरोपी बरी


अयोध्या में छह दिसंबर 1992 को ढहाए गए विवादित ढांचे के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत आज फैसला सुनाया। इस मामले में भाजपा के वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, उमा भारती, विनय कटियार समेत सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया है। 28 वर्ष तक चली सुनवाई के बाद ढांचा विध्वंस के आपराधिक मामले में फैसला सुनाने के लिए सीबीआई के विशेष न्यायाधीश एसके यादव ने सभी आरोपियों को आज तलब किया था।

दरअसल उत्तर प्रदेश की अयोध्या में 6 दिसबंर, 1992 को कारसेवकों की भारी भीड़ के बीच बाबरी मस्जिद गिरा दी गई थी। इस घटना के बाद उसी दिन दो एफआईआर दर्ज की गई। पहली एफआईआर (197/1992) में अज्ञात कारसेवकों को आरोपी बनाया गया। उनके खिलाफ लूट-पाट, चोट पहुंचाने और धर्म के आधार पर दो गुटों में शत्रुता बढ़ाने जैसे आरोप लगाए गए। दूसरी एफआईआर (198/1992) भाजपा, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े उन नेताओं के खिलाफ दर्ज की गई थी।

बाद में पहली एफआईआर से संबंधित जांच सीबीआई को सौंप दी गई और दूसरी एफआईआर की जांच यूपी सीआईडी के हवाले कर दिया गया। 1993 में पहली एफआईआर (197/1992) की सुनवाई के लिए यूपी के ललितपुर में स्पेशल कोर्ट बनाई गई, वहीं दूसरी एफआईआर (198/1992) से जुड़े मुकदमे की सुनवाई रायबरेली की विशेष अदालत को सौंप दी गई। बाद में इन दोनों एफआईआर के अलावा 45 और मुकदमे भी दर्ज किए गए और उन सबको बाद में पहले केस के साथ सीबीआई के हवाले कर दिया गया। इन मुकदमों की सुनवाई के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट के कहने पर लखनऊ में एक नई सीबीआई अदालत गठित हुई।

28 साल पुराने बाबरी विध्वंस केस में सीबीआई कोर्ट का फैसला आ चुका है. कोर्ट ने आडवाणी, जोशी, उमा, कल्याण, नृत्यगोपाल दास सहित सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया है। जज एसके यादव ने फैसला सुनाते हुए कहा कि बाबरी में ढांचा गिराने की घटना पूर्व नियोजित नहीं थी। सुरेंद्र कुमार यादव के कार्यकाल का आज यह अंतिम फैसला होगा। वे आज रिटायर हो रहे हैं. गौरतलब है कि 30 सितंबर 2019 को रिटायर होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाने तक उन्हें सेवा विस्तार दे रखा है।

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