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10-Jul-2020

बिहार विधानसभा चुनाव स्थगित करने की मांग, युवाओं ने कहा नीतीश ही बने रहे मुख्यमंत्री


बिहार में विधान सभा चुनाव को लेकर एक तरफ सरगर्मी बढ़ गई है दूसरी तरफ राज्य के युवाओं ने चुनाव आयोग से एक अजीबो-गरीब मांग कर दी है। छात्रों का कहना है कि जब कोरोना संक्रमण को देखते हुए बिना एग्जाम के छात्रों को प्रमोट किया जा सकता है तो फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को वगैर चुनाव के गले पांच साल के लिए क्यों मुख्यमंत्री नहीं बनाया जा सकता? इसी तरह की मांग लेकर आज पटना के युवाओं ने चुनाव आयोग को एक ज्ञापन सौंपा है।

इस संबंध में छात्रों ने चुनाव आयोग को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि कोरोना महामारी को देखते हुए सीबीएससी और आईसीएसई बोर्ड 10वीं और 12वीं की परीक्षा को रद्द करके आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर रिजल्ट देने का फैसला लिया है। ठीक उसी तरह हम चुनाव आयोग से आग्रह करना चाहते हैं कि कोरोना महामारी को देखते हुए और बिहार के हित को ध्यान में रखकर बिहार विधानसभा के आगामी चुनाव को रद्द किया जाए।

युवाओं ने निर्वाचन आयोग से मांग किया कि, पिछले 15 सालों में नीतीश सरकार ने जिस तरह से काम किए हैं, उसे देखते हुए यह फैसला लिया जाए। बता दें कि, इस साल अक्टूबर-नवंबर के महीनों में बिहार में विधानसभा के चुनाव होने हैं। इसको लेकर राज्य में निर्वाचन आयोग सहित तमाम राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं।

पटना के युवाओं द्वारा निर्वाचन आयोग को ऐसा पत्र भेजने को लेकर आयोग की तरफ से भले अभी तक कोई प्रतिक्रिया न आई हो, लेकिन सियासी हलचल जरूर बढ़ गई है। राजद ने जहां इसको लेकर सत्तारूढ़ जेडीयू पर हमला किया है, वहीं जदयू का कहना है कि ऐसे किसी पत्र के बारे में पार्टी को जानकारी नहीं है। राजद के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा, 'नीतीश कुमार आने वाले चुनाव की चुनौतियों को देखते हुए पहले ही हार मान चुके हैं, इसलिए अपने लोगों से इस तरह की मांग करवा रहे हैं।