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3-Dec-2020

हाथरस केस में न्यायालय ने स्वत: संज्ञान लेकर यूपी सरकार के शीर्ष अफसरों को किया तलब


इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने हाथरस में दलित लड़की के साथ घटी घटना को गंभीरता से लेते हुए स्वत: संज्ञान लिया है। गुरुवार को कोर्ट ने घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए अपर मुख्य सचिव, डीजीपी, एडीजी लॉ एंड आर्डर और हाथरस के जिलाधिकारी व एसपी को 12 अक्टूबर को तलब करते हुए उनसे पूरे मामले में स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने पीड़िता के साथ हाथरस पुलिस के बर्बर, क्रूर और अमानवीय व्यवहार पर राज्य सरकार से भी प्रतिक्रिया मांगी है।

कोर्ट ने हाथरस की घटना पर पुलिस और प्रशासन के कृत्य पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सख्त निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी, एडीजी कानून और व्यवस्था, हाथरस डीएम और एसपी को नोटिस जारी कर उन्हें अगली सुनवाई पर तलब किया है। अदालत ने यह भी कहा है कि अधिकारी कोर्ट में मामले से संबंधित दस्तावेजों के साथ हाजिर हों।

हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले से ही ये तय किया है कि जीवन ही नहीं बल्कि मृत्यु के बाद गरिमापूर्ण ढंग से अंतिम संस्कार भी एक मौलिक अधिकार है। मृतक के शव को उनके घर ले जाया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। हमारे समक्ष मामला आया जिसके बारे में हमने संज्ञान लिया है यह केस सार्वजनिक महत्व और सार्वजनिक हित का है।

हाथरस की घटना को लेकर प्रशासन पर शुरू से ही सवाल उठ रहे हैं। हाथरस के डीएम पर अब पीड़िता के परिजनों ने गंभीर लगाए हैं। पीड़िता के परिजनों ने प्रशासन पर धमकाने और दबाव डालने का आरोप लगाया है। दरअसल, एक वीडियो सामने आया है, जिसमें हाथरस के डीएम प्रवीण कुमार पीड़ित परिवार को धमकी देते दिख रहे हैं। हाथरस के डीएम कह रहे हैं कि मीडिया वाले तो चले जाएंगे, लेकिन प्रशासन को यहीं रहना है।

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