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15-Jan-2021

सब दिन सं कला, धर्म आ संस्कृति’क प्रतीक रहल अछि मिथिला


बिहारक उत्तरी तथा नेपालक सीमावर्ती क्षेत्र मिथिलांचल, प्राचीन भारत में मिथिला राज्य के नाम स जानल जाइत छल. मिथिलाक राजवंश के संस्थापक निमि छलाह. मिथि निमि के पुत्र छलाह, ताहि कारने अहि क्षेत्रक नाम मिथि के नाम पर मिथिला राखल गेल. चूँकि प्राचीन कालक मिथिला क्षेत्रक क्षेत्रफल वर्तमान मिथिला क्षेत्र स अधिक छल, वर्तमान समय में मिथिलाक एकटा पैघ भाग नेपालक हिस्सा में अबैत अछि. शास्त्रक अनुसार, मिथिलाक सम्पन्नता, वैभवता, संस्कृति तथा आतिथ्य सत्तकार ओहि समयक राज्य में सबस अधिक उन्नत तथा उत्कृष्ट छल. जाहि कारने मिथिलाक संस्कृतिक मिठास मिथिलाक धरती के संगहिं स्थानीय जनमानस में आई धरी व्याप्त अछि.

ग्रंथक बात करी त, मिथिलाक उल्लेख सर्वप्रथम रामायण में कायल गेल अछि. रामायणक संग-संग महाभारत, पुराण तथा जैन एवं बौद्ध ग्रंथ में सेहो मिथिलाक उल्लेख भेटैत अछि. गंगा, गंडक, कोसी, कमला, बलान इत्यादि नदीक प्रवाह के कारण मिथिला में व्यापारी के एन-गेन लगातार बनल रहल. व्यापारिक गतिविधि के कारने एतय सिल्क, पान, मखान तथा माँछक उत्पादन में वृद्धि भेल जाहि स मिथिला क्षेत्र व्यापारिक केंद्र बनल.

महान भारतीय महाकाव्य रामचरितमानसक ऐतिहासिक पात्र तथा हिन्दू धर्मक परिचायिका सीताक जन्मभूमि मिथिले के मानल गेल अछि. मिथिलाक धरती पर विष्णु अवतार श्री रामचन्द्र स्वं सीता स विवाह करबा लेल आबि मैथिल जनमानस के कृतार्थ कयने छला. जाहि कारने मिथिला में दामाद के विष्णुक समकक्ष मानल जाइत अछि. अहि सब स भिन्न मिथिला स बहुतो पौराणिक कथा जुड़ल अछि. पुराणक अनुसार, राम अहिल्याक उद्धार एतहि कयने छला. मिथिलेक धरती पर अर्जुनक तपस्या स प्रसन्न भय शंकर अर्जुन के गांडीव धनुष देने छला. मिथिला के प्राचीने काल स विद्वानक धरती कहल जाइत रहल अछि. जौं एतय शिक्षाक बात करी त, बाह्य आक्रमण स सुरक्षित हेबाक कारने नगरक वातावरण शांतिमय छल, जाहि स एतय उच्च शिक्षा तथा सांस्कृतिक वृद्धि संभव भेल.

मिथिला जतेक ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यता वला क्षेत्र अछि ओतबे शैक्षिक रूप स संपन्न सेहो अछि. अहि ठामक शांतिप्रय आ धार्मिक वातावरण विद्धजन के सकारात्मक अवसर देलक, जाहि स एतय उच्च शिक्षा आ संस्कृतिक विकास संभव भेल. मंडन-अयाची के अहि धरती पर स्वं शंकराचार्य के पराजित होबय परलनि. एतहि 14वीं शताब्दी में मैथिलीक विशिष्ठ जानकार, सुधि और विद्वान रचनाकार विद्यापतिक जन्म भेल. मिथिले में कवि श्रेष्ठ कालिदास के विद्वताक वरदान भेटलनि.

मिथिला धार्मिक, ऐतिहासिक और शिक्षाक संग-संग सांस्कृतिक रूप स सेहो संपन्न अछि. एतय वर्ष भरी भिन्न-भिन्न तरहक पर्वक आयोजन कय लोक एक-दोसराक संग ख़ुशी बटबा में व्यस्त रहैत छथि. विश्व स्तर पर मिथिला मात्र एकटा एहेन क्षेत्र अछि जतय सब अवसर पर विभिन्न लोकगीतक प्रचलन अछि. बटगबनी, महेशवाणी, नचारी, लगनी, पराती, परिछन, डहकन इत्यादि मिथिलाक लोकगीतक क्षेणी अछि. मिथिला में एहेन कोनो प्रहर नहि जाहि लेल गीत नै हो. नृत्य कल में सेहो सामा-चकेबा तथा झिझिया मिथिलाक प्रसिद्ध लोक नृत्य के रूप में प्रसिद्ध अछि. विशेष अवसर पर मिथिला में भित्ति चित्र द्वारा दिवार पर खास किस्मक कलाकृति बनाउल जाइत अछि. जे वर्तमान समय में समुच्चा विश्व भरी में मिथिला पेंटिंग के नाम स जनल जाइत अछि. मिथिला में धोती-मिर्जई, पाग तथा खड़ाऊं मुख्य पहनावा के रूप में प्रचलित अछि, जे एखनहु विशेष अवसर पर पहिरल जाइत अछि.

भारत के ई प्राचीन धरोहर आई प्रशासनिक उदासीनताक दंश झेल रहल अछि. मिथिलाक शैक्षणिक स्तर लगातार न्यून भेल गेल अछि, रोजगार के माध्यम चीनी मील, खादी भण्डार, मछली उत्पादन केंद्र तथा मखान अनुसंधान केंद्र बंद पड़ल अछि. ऐतिहासिक तथा धार्मिक स्थल में शुमार मिथिला क्षेत्र एखनहुँ पर्यटन स्थल बनबाक लेल बाट जोहि रहल अछि. विश्व स्तर पर प्रसिद्ध मिथिला पेंटिंग के प्रचार-प्रसार लेल सेहो कोनो ठोस कदम नहिं उठाओल जा रहल अछि. कला, धर्म और संस्कृति के प्रतिक मिथिलाक धरोहर अप्पन जर्जर स्वरुपक दिशा में अग्रसर अछि, मिथिला आई अप्पन समुचित विकासक लेल चिकरी-चिकरी क सरकारी तथा सार्वजानिक क्षेत्र स व्यापक स्तर पर सार्थक हस्तक्षेपक मांग कय रहल अछि.