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1-Oct-2020

नाच-गान आ सम्मान समारोह मे ओझराओल ‘मिथिला आंदोलन’


‘मिथिला आंदोलन’ आजुक समय में एकटा एहेन मुद्दा बनि चुकल अछि जे हरेक दोसर-तेसर प्रवासी मैथिलक मुहें सुनबा में आबि जाएत अछि। ओना ई मुद्दा मिथिलाक धरातल पर नहि भेटैत अछि। कारण की से नहि जानि मुदा मिथिला आंदोलन आजुक समय मे पैघ आ राष्ट्रीय स्तरक मुद्दा बनल अछि। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित दर्जनों शहर मे सैकड़ो मैथिल संस्थान समय समय पर अहि आंदोलन मे आहुति देबाक दावा करैत रहैत छथि। मुदा लगभग सब संस्था विद्यापति समारोहक नाम पर नाच-गान आ समारोह मे एक दोसरा कें अहि उत्कृष्ट काजक लेल सम्मान देबा धरि सिमित रहि जाइत अछि।

दिल्ली मे साल भरि विद्यापति समारोहक नाम पर सम्मान बटबाक ढोंग चलैत रहैत अछि। हालांकि दिल्लीए मे नहि कमोबेस प्रवासी द्वारा संचालित सब संस्थाक यैह हाल अछि, अहि क्रम मे हालहिं मे संपन्न भेल ‘अटल सम्मान’क बटबारा सं आश्चर्य नहि भेल। कारण दिल्ली मे एक दोसराक सम्मान करबाक चलन बहुत पहिनहि सं चलन मे अछि। हालांकि अटल सम्मान मैथिल संस्थान द्वारा संचालित जरूर छल मुदा आयोजक द्वारा पहिने बताओल गेल छल जे ई राष्ट्रीय स्तरक सम्मान समारोह अछि ताहि कारणे अहि विषय पर अधिक चर्चा नहि हेबाक चाही।

हमरा जनैत प्रवासी मैथिल द्वारा संचालित अहि संस्थाक ‘मिथिला आंदोलन’क नाम पर साल भरिक अंतराल पर विद्यापति समारोह मात्र एकटा लक्ष्य रहैत अछि जाहि में दर्जनों लोकक सम्मान आ नाच गानक अलावा और किछु नहि। आखिर प्रश्न ई अछि जे ‘मिथिला आंदोलन’ किएक? एकर कोन आवश्यकता? अहि सं मिथिलाक विकास कोना? यदि विद्यापति समारोह कें राष्ट्रीय स्तर पर पर्व बनेनाई मिथिला आंदोलनक मूल तत्व अछि तहन त अहि दिशा में ठोसगर काज भए रहल अछि।

मिथिला आंदोलन मे सक्रीय अहि संस्थाक मूल लक्ष्य की से नहि जानि मुदा जाहि तरहे अहि संस्था द्वारा विद्यापति आ मिथिलाक नाम पर कार्यक्रम संचालित होएत आबि रहल अछि ओकर आधो उत्साह सं मिथिला आंदोलनक मूल मे आबि लक्ष्य निर्धारित कए काज काएल जाए त जल्दिए मिथिलाकेँ, मैथिली भाषा कें, मैथिल संस्कृति कें सकारात्मक आ एकटा नीक दिशा मे स्थापित काएल जा सकैत अछि।

एकटा मैथिल संस्थाक अध्यक्ष कहलनि जे विद्यापति समारोह करेबा मे बहुत परेशानी अछि बहुत रुपैयाक काज पड़ैत छैक संगहि सब कें मोन सं चलबाक लेल संस्थाक संचालक प्रतिबद्ध भए जाएत अछि, सांस्कृतिक कार्यक्रम आ सम्मानक लेल बहुत माथा-पेची करए पड़ैत छैक। ई पुछला पर की विद्यापति समारोह मे सांस्कृतिक कार्यक्रम मे गीत संगीत नहि प्रबुद्ध कवि आ साहित्यकार सं मनोरंजनक लेल कवि सम्मलेन आ कथा वाचन कराओल जाए त कोन हर्ज? ताहि पर ओ कहलनि लोकक जुटाने अहि पर होइत अछि कवि सम्मेलनक नाम पर एकहु टा लोक नहि आओत।

एखन मिथिला आंदोलन नाच गान आ विद्यापति समारोह मे सम्मान बटबा मे ओझराओल अछि। किछु प्रबुद्ध अहि सं भिन्न छथि जे असगरो दिल्ली विश्वविद्यालय आ बनारस विश्वविद्यालय मे मैथिलीक पढ़ौनीक लेल जखनहि-तखनहि उपस्थित होइत रहैत छथि त किछु लोक अनायास कोनो मुद्दा पर जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शनक लेल पहुँचैत छथि जिनकर लक्ष्य मिथिला आंदोलनक लेल निर्धारित छन्हि मुदा मिथिला आन्दोलनक नाम पर संस्था संचालित केनिहार सब भदबरिया बेंग जेना साल मे एक बेर जगैत छथि आ सम्मानक लेन-देन कए निश्चिंत भए जाएत छथि।