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3-Dec-2020

गणेश चतुर्थी पर 126 साल बाद बन रहा ऐसा संयोग, जाने गणपति स्थापना का मंगल मुहूर्त


पूरे देश में गणेश चतुर्थी की तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन इस चतुर्थी को बहुत ही खास योग बन रहा। ऐसा योग 126 साल बाद बना है। इस साल 22 अगस्त यानी शनिवार को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा। इस वर्ष गणेश चतुर्थी ऐसे समय में मनाई जा रही है जब सूर्य सिंह राशि में और मंगल मेष राशि में हैं। सूर्य और मंगल का यह योग 126 साल बाद बन रहा है।

मध्यान्ह गणेश पूजन मुहूर्त 10:46 सुबह से 1:57 दोपहर तक है। वर्जित चंद्रदर्शन का समय 8:47 रात से 9:22 रात तक रहेगा। चतुर्थी तिथि आरंभ 21 अगस्त की रात 11:02 बजे से होगा जबकि चतुर्थी तिथि 22 अगस्त की रात 7:56 बजे समाप्त होगा। बता दें कि महिलाओं का प्रमुख व्रत हरतालिका तीज इस बार 21 अगस्त को मनाया जाएगा।

वास्तुशास्त्र कहता है कि गणेशजी की आराधना के बिना वास्तु देवता की संतुष्टि नहीं होती है। इसलिए गणपति की आराधना से व्यक्ति हर वास्तु दोष को दूर कर सकता है। वास्तु पुरुष की प्रार्थना पर ब्रह्माजी ने मानव कल्याण के लिए वास्तुशास्त्र के नियमों की रचना की थी। इनकी अनदेखी करने पर गृहकलेश की स्थिति बनती है और घर के सदस्यों को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक हानि उठानी पड़ती है।

इस बार कोरोना को देखते हुए प्रशासन ने सार्वजनिक आयोजनों पर रोक लगा दी है। ऐसे में सड़क किनारे लगने वाले पंडाल भी नहीं दिखेंगे। जिसमें बड़ी प्रतिमाएं स्थापित की जाती रहीं। यह जरूर है कि घर-घर में छोटी प्रतिमाएं रखी जा सकती हैं। यही नहीं गणेश मंदिरों में भी पूजन के दौरान इस बात का ध्यान रखना होगा कि ज्यादा लोग शामिल न हों।

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