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10-Jul-2020

‘राघोपुर बलाट’ पंचायत के क्वारंटाइन सेंटर का हाल बेहाल, मुखिया और पंचायत सेवक पर लगे गंभीर आरोप


एक ओर जहां पिछले 3 महीनों से देश कोरोना से जंग लड़ने को मजबूर है वहीं दूसरी ओर कुछ जन-प्रतिनिधि और सरकारी कर्मचारियों की लापरवाही और लूट वाले मनोभाव से नागरिक परेशान हैं। बिहार के कई इलाकों में क्वारंटाइन सेंटर का बुरा हाल उजागर हो चुका है। कहीं भोजन नहीं तो कहीं सोने को बिस्तर नहीं। कहीं सैनिटाइजर की कमी तो कहीं जर्जर शौचालय से परेशान प्रवासी, लेकिन किसे फर्क पड़ता है...? शहरी क्षेत्र हो या ग्रामीण हर जगह यही हाल है।



ऐसा ही हाल देखने को मिला है मधुबनी जिला स्थित राघोपुर-बलाट पंचायत के क्वारंटाइन सेंटर का। राघोपुर बलाट स्थित उच्च विद्यालय में नाम मात्र व्यवस्थित क्वारंटाइन सेंटर में 50 से अधिक प्रवासी क्वारंटाइन हैं। यहां शुरुआत में प्रखंड कार्यालय से भोजन भेजने की व्यवस्था की गई थी लेकिन वो भी निम्न स्तर की। प्रवासियों के विरोध करने के बाद पूर्व मुखिया संजय मिश्र ने क्वारंटाइन सेंटर परिसर में ही भोजन बनवाने की व्यवस्था करवाई। पूर्व मुखिया संजय मिश्र ने वर्तमान मुखिया दीपा देवी पर आरोप लगाते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि अभी तक प्रवासियों का हाल देखने घर से बाहर नहीं निकली हैं।



उन्होंने कहा कि क्वारंटाइन सेंटर को सैनिटाइज करने की कोई व्यवस्था नहीं है। सोने के लिए प्रवासियों को चटाई और दरी को दो खण्डों में काट कर दिया गया था। क्वारंटाइन सेंटर में सुरक्षा घेरे का इंतजाम नहीं है। यहां पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई तथा शौचालय का हाल बेहाल है। हालांकि क्वारंटाइन सेंटर की देखरेख प्रखंड स्तर पर की जाती है जिसकी जिम्मेदारी पंचायत सेवक की होती है। बता दें कि पंचायती राज में पंचायत सेवक और मुखिया के नेतृत्व में ही विकास का कार्य सम्पादित होता है। राघोपुर बलाट पंचायत में पंचायत सेवक के पद पर कार्यरत अशोक कुमार सिंह विरले ही क्वारंटाइन सेंटर पर दिखाई देते हैं।

 

ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री नीतीश ने साफ कहा था गांवों में लॉकडाउन का उल्‍लंघन होगा तो इसकी जिम्‍मेवारी मुखिया की होगी। लेकिन राघोपुर पंचायत में जब लॉक डाउन का उल्‍लंघन की सूचना वर्तमान मुखिया दीपा देवी को दी गई तो उन्होंने साफ़ कहा कि हमे इससे कोई मतलब नहीं है। बता दें कि उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने पहले ही कहा था कि पंचायतें पांचवे वित्त आयोग से मिली अनुदान राशि से नागरिकों, कर्मचारियों और आइसोलेशन वार्ड में रह रहे लोगों को मास्क, सैनिटाइजर, साबुन, ग्लब्स जैसी चीजों को मुहैया कराने के लिए खर्च कर सकेंगी। इनमें ब्लिचिंग पाउडर और अन्य चीजों का छिड़काव भी शामिल है। सुशील मोदी ने कहा था कि ग्राम पंचायतों के अनुदान मद में 9 लाख रुपये हैं जिसे खर्च करने के लिए सरकारी अनुमति दी गई है। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि अभी तक इन पैसों का जनहित में उपयोग नहीं किया गया है।